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Uttar Pradesh : साल 2028 में उत्तर प्रदेश बन जाएगा भारत का दूसरा सबसे विकसित राज्य।

उत्तरप्रदेश

भारत के आर्थिक विकास में राज्यों का योगदान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और वित्तीय विश्लेषणकर्ताओं ने प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार, यूपी ने अपने विकासी पथ पर गति बढ़ाते हुए एक बड़े कदम उठाया है।

इसी के साथ 2028 तक उत्तर प्रदेश भारत का दूसरा समृद्ध राज्य बन जाएगा जिसकी भारतीय GDP में सहभागिता 10 प्रतिशत या उससे ज्यादा होगी इस लिस्ट में अभी उत्तर प्रदेश का स्थान तीसरा है जो की पहला महाराष्ट्र दूसरा तमिलनाडु के बाद आता है और यह कयास लगाए जा रहे है की उत्तर प्रदेश तमिलनाडु को पीछे छोड़ते हुए 2028 तक दूसरे नंबर पर आ जाएगा।

यहां भारत के जीडीपी में योगदान के प्रोजेक्टेड शेयर का एक तालिका है जो FY28 के लिए है:

राज्य FY28 में प्रोजेक्टेड जीडीपी योगदान (%)
महाराष्ट्र               13%
उत्तर प्रदेश               10%
तमिलनाडु                 8%
कर्नाटक                 8%
गुजरात                 7%
राजस्थान                 5%
आंध्र प्रदेश                 5%
तेलंगाना                 5%
मध्य प्रदेश                 5%
केरल                 4%
दिल्ली                 4%
पश्चिम बंगाल                 4%
हरियाणा                 4%
बिहार                 3%
पंजाब                 3%

 

यूपी का बढ़ता योगदान:

यूपी, भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते कदम रखते हुए एक महत्वपूर्ण राज्य बन गया है। सूचना और विश्लेषण के अनुसार, यूपी का योगदान आने वाले साल में इंडिया के जीडीपी में 10% के करीब होने की उम्मीद है। योगी आदित्यनाथ की सक्रिय नेतृत्व में यूपी के विकास को गति मिली है और राज्य के उद्योग, कृषि, और वित्तीय क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आए हैं। सरकार के विकास कार्यक्रमों और विशेष योजनाओं ने राज्य को उत्तर भारत के अर्थव्यवस्था के गहरे अंग में बना दिया है।

बिहार और पंजाब का सबसे पिछड़ जाना:

विश्लेषण के मुताबिक, इन आंकड़ों से साफ होता है कि बिहार और पंजाब दोनों ही सबसे पिछड़ जा रहे हैं। बिहार एक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है, और इसमें उद्योग, कृषि, और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने के लिए अधिक सक्रिय कदम उठाने की जरूरत है। पंजाब, जो किसानों के लिए मशहूर रहा है, उसमें कृषि के साथ-साथ उद्योग और वित्तीय क्षेत्र में भी विकास के लिए अधिक सावधानी की आवश्यकता है। इन राज्यों को उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराधिकारी बनने के लिए काम करने की आवश्यकता है ताकि भारत के विकास के गतिविधियों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भागीदारी हो सके।

वेस्ट बंगाल की चुनौती:

वेस्ट बंगाल, जो पूर्व में उद्योगों के लिए मशहूर था, आज भी उद्योग, व्यापार, और सरकारी सुविधाओं के क्षेत्र में चुनौती में है। इस राज्य की सरकार को उद्योगों और व्यापार को प्रोत्साहन देने के लिए सक्रिय कदम उठाने की जरूरत है जिससे वेस्ट बंगाल अपनी उच्चतम विकास दर को पुनः प्राप्त कर सके। इससे राज्य के लोगों को रोजगार के और उत्तराधिकारी विकास के अवसर मिलेंगे और राज्य का सामाजिक और आर्थिक समृद्धि के साथ विकास हो सकेगा।

इस विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि यूपी के विकास के कदमों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला दिया है। पंजाब और बिहार के पिछड़ने से यह साबित होता है कि राज्यों को सक्रिय रूप से उत्थान करने की जरूरत है। वेस्ट बंगाल को भी अपने उद्योगों और व्यापार को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है ताकि राज्य की उच्चतम समृद्धि को पुनः प्राप्त किया जा सके। इससे राज्यों के लोगों को रोजगार के और उत्तराधिकारी विकास के अवसर मिलेंगे और देश की सामाजिक और आर्थिक समृद्धि में नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने की संभावना है। इस नए उत्थान की प्रतीक्षा में, भारतीय अर्थव्यवस्था नई उच्चतम समृद्धि की दिशा में बढ़ती हुई नजर आ रही है।

यह एक रिसर्च में सामने आया है जोकि WEO (वर्ल्ड इकोमॉमी आउटलुक) और SBI Research (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया रिसर्च) के द्वारा किया गया सर्वे है।

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