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Mann Ki Baat : मन की बात 103वां एपिसोड में क्या क्या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी

अराजनैतिक मंच कहे जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम का 103वां एपिसोड आज प्रसारित हुआ। हालांकि इस एपिसोड में 15 अगस्त से लेकर , सावन के महीना से लेकर जलसंरक्षण और वृक्षारोपण तक की बातो पर प्रधानमंत्री ने विस्तृत चर्चा की। उन्होंने अपील की कि सभी को 15 अगस्त के दिन हर घर में तिरंगा फहराना है। इसके अलावा उन्होंने देश में अमेरिका से 100 से ज्यादा दुर्लभ और प्राचीनतम कलाकृतियां लौटाये जाने की जानकारी दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी आपदा से निपटने में हमारे सामर्थ्य और संसाधनों की भूमिका बड़ी होती है, लेकिन इसके साथ ही, हमारी संवेदनशीलता और एक दूसरे का हाथ थामने की भावना, उतनी ही अहम होती है. सर्वजन हिताय की यही भावना भारत की पहचान भी है और भारत की ताकत भी है. साथियों, बारिश का यही समय ‘वृक्षारोपण’ और ‘जल संरक्षण’ के लिए भी उतना ही जरूरी होता है. आजादी के ‘अमृत महोत्सव’ के दौरान बने 60 हजार से ज्यादा अमृत सरोवरों में भी रौनक बढ़ गई है. अभी 50 हजार से ज्यादा अमृत सरोवरों को बनाने का काम चल भी रहा है. हमारे देशवासी पूरी जागरूकता और जिम्मेदारी के साथ ‘जल संरक्षण’ के लिए नए-नए प्रयास कर रहे हैं।

इस समय ‘सावन’ का पवित्र महीना चल रहा है। सदाशिव महादेव की साधना-आराधना के साथ ही ‘सावन’ हरियाली और खुशियों से जुड़ा होता है। इसीलिए ‘सावन’ का आध्यात्मिक के साथ ही सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्व रहा है. सावन के झूले, सावन की मेहंदी, सावन के उत्सव यानी ‘सावन’ का मतलब ही आनंद और उल्लास होता है। साथियों, हमारी इस आस्था और इन परम्पराओं का एक पक्ष और भी है. हमारे ये पर्व और परम्पराएं हमें गतिशील बनाते हैं. सावन में शिव आराधना के लिए कितने ही भक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं. ‘सावन’ की वजह से इन दिनों 12 ज्योतिर्लिंगों में भी खूब श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. आपको ये जानकार भी अच्छा लगेगा कि बनारस पहुंचने वाले लोगों की संख्या भी रिकॉर्ड तोड़ रही है. अब काशी में हर साल 10 करोड़ से भी ज्यादा पर्यटक पहुंच रहे हैं. ये सब, हमारे सांस्कृतिक जन-जागरण का परिणाम है. इसके दर्शन के लिए, अब तो पूरी दुनिया से लोग हमारे तीर्थों में आ रहे हैं।

इसके अलावा उन्होंने महिलाओं के सम्मान और उनके उत्थान का एक अद्भुत उदाहरण दिया और कहा कि हमें देखने को मिला जब 4000 से अधिक मुस्लिम महिलाओं ने बिना पुरुष साथी या मेहरम के हज किया।यह देश में एक बड़ा बदलाव है क्योंकि पहले मुस्लिम महिलाओं को बिना किसी ‘मेहरम’ के ‘हज’ करने की अनुमति नहीं थी।

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