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मुद्रास्फीति (inflation) तीन महीने के उच्चतम स्तर पर, यहां देखें

मुद्रास्फीति दर (inflation rate)

भारत में मुद्रास्फीति (inflation) जून महीने में उपर चढ़कर पिछले तीन महीनों में उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जून में मुद्रास्फीति दर (inflation rate) मई की तुलना में जून महीने में 0.5% बढ़कर 4.81% पर पहुंच गई।

मुद्रास्फीति दर (inflation rate)मुद्रास्फीति दर (inflation rate) क्या है?

मुद्रा स्फीति दर आमतौर पर एक वर्ष जैसे विशिष्ट समय में सामान्य कीमत के स्तर में प्रतिशत बदलाव को मापती है. तो, मुद्रा-स्फीति का क्या मतलब है? पैसे की आपूर्ति में वृद्धि, वस्तुओं और सेवाओं की मांग में वृद्धि या सेवाओं और वस्तुओं की आपूर्ति में कमी जैसे विभिन्न कारक मुद्रा-स्फीति का कारण बन सकते हैं।
मुद्रा स्फीति या महंगाई किसी अर्थव्यवस्था में समय के साथ विभिन्न माल और सेवाओं की कीमतों (मूल्यों) में होने वाली एक सामान्य बढ़ौतरी को कहा जाता है। जब सामान्य मूल्य बढ़ते हैं, तब मुद्रा की हर ईकाई की क्रय शक्ति (purchasing power) में कमी होती है, अर्थात् पैसे की किसी मात्रा से पहले जितनी माल या सेवाओं की मात्रा आती थी, उसमें कमी हो जाती है। मुद्रास्फीति के ऊँचे दर या अतिस्फीति की स्थिति जनता के लिए बहुत हानिकारक होती है और निर्धनता फैलाने का काम करती है। अर्थशास्त्री मानते हैं कि यह बुरी अवस्थाएँ मुद्रा आपूर्ति (money supply) के अतिशय से उत्पन्न होती है, यानि अर्थव्यवस्था की तुलना में आवश्यकता से अधिक पैसा छापने से ज्न्म लेती है। मुद्रा स्फीति का विपरीत अपस्फीति (deflation) होता है, यानि वह स्थिति जिसमें समय के साथ-साथ माल और सेवाओं की कीमतें गिरती हैं।
मुद्रा स्फीति का माप मुद्रा स्फीति दर से करा जाता है, यानि एक वर्ष से दूसरे वर्ष के बीच मूल्य वृद्धि का प्रतिशत। उदाहरण के लिएः 1990 में एक सौ रुपए में जितना सामान आता था, अगर 2000 में उसे खरीदने के लिए दो सौ रुपए व्यय करने पड़े है तो माना जाएगा कि मुद्रा स्फीति शत-प्रतिशत (100%) बढ़ गई। अधिक मुद्रा-स्फीति का जनता पर बुरा असर पड़ता है क्योंकि उनकी क्रय शक्ति कम होने से उनकी आर्थिक स्थिति और जीवन स्तर में गिरावट आती है। भारत में मुद्रा स्फीति का मापन थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index) तथा औद्योगिक श्रमिक हेतु उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index) से होता है।

क्या यह एक चिंता का विषय है?
मुद्रास्फीति अर्थव्यवस्था (economy) के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, आमतौर पर 5% से कम मुद्रा स्फीति दर चिंता का विषय नहीं मानी जाती और पिछले कुछ महीनों से भारत में यह 5% से कम ही रही है जो हमारी अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत हैं। मुद्रा स्फीति दर का नकारात्मक अंकों में जाना भी अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक होता है, तो आप इस विषय पर क्या सोचते हैं हमें कमेंट में अवश्य बताएं।

और अधिक जानकारी के लिए देखें: Inflation explained by wikipedia in Hindi

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